श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 272
 
 
श्लोक  1.2.272 
प्रयाणे परुषश्चात्र संवाद: कर्णशल्ययो:।
हंसकाकीयमाख्यानं तत्रैवाक्षेपसंहितम्॥ २७२॥
 
 
अनुवाद
युद्ध के लिए जाते समय कर्ण और शल्य के बीच हुए कठोर संवाद का भी इस पर्व में वर्णन है। इसके बाद हंस और कौए की विवादास्पद कथा भी है।
 
The harsh conversation between Karna and Shalya while going for the war is also described in this parva. After that, there is a controversial story of a swan and a crow. 272.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)