श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 270-271
 
 
श्लोक  1.2.270-271 
अत: परं कर्णपर्व प्रोच्यते परमाद्‍भुतम्॥ २७०॥
सारथ्ये विनियोगश्च मद्रराजस्य धीमत:।
आख्यातं यत्र पौराणं त्रिपुरस्य निपातनम्॥ २७१॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद अत्यन्त अद्भुत कर्णपर्व का परिचय दिया गया है। इसमें परम बुद्धिमान मद्रराज शल्य को कर्ण का सारथि बनाने का प्रसंग है, तदनन्तर त्रिपुरों के विनाश की प्रसिद्ध कथा है। 270-271॥
 
After this, the very wonderful Karna Parva has been introduced. In this, there is the incident of making the most intelligent Madraraj Shalya the charioteer of Karna, then there is the famous story of the destruction of Tripura. 270-271॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)