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mahabharat 1.2.27: तपोधानो! संख्याओं के तत्त्व को जानने वाले विद्वानों ने इसे अक्षौहिणी कहा है, जिसे मैंने विस्तारपूर्वक तुमसे कहा है॥27॥   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.2.27 
एतामक्षौहिणीं प्राहु: संख्यातत्त्वविदो जना:।
यां व: कथितवानस्मि विस्तरेण तपोधना:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
तपोधानो! संख्याओं के तत्त्व को जानने वाले विद्वानों ने इसे अक्षौहिणी कहा है, जिसे मैंने विस्तारपूर्वक तुमसे कहा है॥27॥
 
Tapodhano! Scholars who know the essence of numbers have called this Akshauhini, which I have told you in detail. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)