श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 267-270h
 
 
श्लोक  1.2.267-270h 
सप्तमं भारते पर्व महदेतदुदाहृतम्।
यत्र ते पृथिवीपाला: प्रायशो निधनं गता:॥ २६७॥
द्रोणपर्वणि ये शूरा निर्दिष्टा: पुरुषर्षभा:।
अत्राध्यायशतं प्रोक्तं तथाध्यायाश्च सप्तति:॥ २६८॥
अष्टौ श्लोकसहस्राणि तथा नव शतानि च।
श्लोका नव तथैवात्र संख्यातास्तत्त्वदर्शिना॥ २६९॥
पाराशर्येण मुनिना संचिन्त्य द्रोणपर्वणि।
 
 
अनुवाद
महाभारत में इसे सातवाँ महापर्व बताया गया है। कौरव-पाण्डव युद्ध में जिन श्रेष्ठ राजाओं और योद्धाओं का वर्णन किया गया है, उनमें से अधिकांश की मृत्यु की घटना इसी द्रोण पर्व में घटित हुई है। तत्त्वज्ञ पराशरनन्दन मुनिवर व्यास ने विचारपूर्वक द्रोण पर्व में एक सौ सत्तर (170) अध्याय और आठ हजार नौ सौ नौ (8,909) श्लोकों की रचना और गणना की है। 267—269 1/2॥
 
This is described as the seventh great festival in Mahabharata. The incident of death of most of the best kings and warriors who have been mentioned in the Kaurava-Pandava war has happened in this Drona Parva. Philosopher Parasharanandan Munivar Vyas has composed and calculated one hundred seventy (170) chapters and eight thousand nine hundred nine (8,909) verses in Drona Parva after careful consideration. 267—269 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)