श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 266
 
 
श्लोक  1.2.266 
आग्नेयं कीर्त्यते यत्र रुद्रमाहात्म्यमुत्तमम्।
व्यासस्य चाप्यागमनं माहात्म्यं कृष्णपार्थयो:॥ २६६॥
 
 
अनुवाद
इसमें आग्नेयास्त्रों और भगवान रुद्र के माहात्म्य का वर्णन किया गया है। व्यासजी के आगमन तथा श्रीकृष्ण और अर्जुन के माहात्म्य की कथा भी इसमें है ॥266॥
 
In this, firearms and the greatness of Lord Rudra have been described. The story of Vyasji's arrival and the greatness of Shri Krishna and Arjun is also there in this. 266॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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