श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 265
 
 
श्लोक  1.2.265 
अश्वत्थामापि चात्रैव द्रोणे युधि निपातिते।
अस्त्रं प्रादुश्चकारोग्रं नारायणममर्षित:॥ २६५॥
 
 
अनुवाद
इसी पर्व में यह भी उल्लेख है कि जब युद्ध में उसके पिता द्रोणाचार्य मारे गये, तब शत्रुओं के प्रति क्रोध से भरे हुए अश्वत्थामा ने 'नारायण' नामक भयंकर अस्त्र प्रकट किया।
 
In this very festival it is also mentioned that when his father Dronacharya was killed in the war, then Ashvatthama, filled with anger towards the enemies, manifested a terrible weapon called 'Narayana'. 265.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)