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mahabharat 1.2.259-260: उसी समय धर्मराज युधिष्ठिर के आदेश से महाबाहु भीमसेन और महाबली सात्यकि अर्जुन की खोज में कौरव सेना में घुस गये, जिनकी किलेबंदी को बड़े-बड़े देवता भी नहीं तोड़ सके थे।   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 259-260
 
 
श्लोक  1.2.259-260 
यत्र भीमो महाबाहु: सात्यकिश्च महारथ:॥ २५९॥
अन्वेषणार्थं पार्थस्य युधिष्ठिरनृपाज्ञया।
प्रविष्टौ भारतीं सेनामप्रधृष्यां सुरैरपि॥ २६०॥
 
 
अनुवाद
उसी समय धर्मराज युधिष्ठिर के आदेश से महाबाहु भीमसेन और महाबली सात्यकि अर्जुन की खोज में कौरव सेना में घुस गये, जिनकी किलेबंदी को बड़े-बड़े देवता भी नहीं तोड़ सके थे।
 
On that very occasion, the mighty-armed Bhimasena and the mighty warrior Satyaki, on the orders of Dharmaraja Yudhishthira, entered the Kaurava army in search of Arjuna, whose fortifications could not be broken even by the greatest of gods.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)