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mahabharat 1.2.255: ऐसा भी कहा जाता है कि अस्त्रविद्या के परम गुरु द्रोण ने दुर्योधन को प्रसन्न करने के लिए बुद्धिमान धर्मराज युधिष्ठिर को पकड़ने की प्रतिज्ञा की थी ॥255॥   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 255
 
 
श्लोक  1.2.255 
दुर्योधनस्य प्रीत्यर्थं प्रतिजज्ञे महास्त्रवित् ।
ग्रहणं धर्मराजस्य पाण्डुपुत्रस्य धीमत:॥ २५५॥
 
 
अनुवाद
ऐसा भी कहा जाता है कि अस्त्रविद्या के परम गुरु द्रोण ने दुर्योधन को प्रसन्न करने के लिए बुद्धिमान धर्मराज युधिष्ठिर को पकड़ने की प्रतिज्ञा की थी ॥255॥
 
It is also said that Drona, the supreme master of weaponry, vowed to capture the wise Dharmaraja Yudhishthira to please Duryodhana. 255॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)