श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 251
 
 
श्लोक  1.2.251 
शरतल्पगतश्चैव भीष्मो यत्र बभूव ह।
षष्ठमेतत् समाख्यातं भारते पर्व विस्तृतम्॥ २५१॥
 
 
अनुवाद
जब भीष्मपितामह शय्या पर सोने लगे, तब महाभारत में इस छठे पर्व का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है ॥251॥
 
While Bhishmapitamah started sleeping on the bed. This sixth festival has been described in detail in the Mahabharata. 251॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)