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mahabharat 1.2.25: हे भोले ब्राह्मणों! एक अक्षौहिणी में चलने वाले मनुष्यों की संख्या एक लाख नौ हजार तीन सौ पचास (1,09,350) जाननी चाहिए।॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.2.25 
ज्ञेयं शतसहस्रं तु सहस्राणि नवैव तु।
नराणामपि पञ्चाशच्छतानि त्रीणि चानघा:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हे भोले ब्राह्मणों! एक अक्षौहिणी में चलने वाले मनुष्यों की संख्या एक लाख नौ हजार तीन सौ पचास (1,09,350) जाननी चाहिए।॥ 25॥
 
Innocent Brahmins! The number of people walking in one Akshauhini should be known to be one lakh nine thousand three hundred fifty (1,09,350).॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)