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mahabharat 1.2.249: उसी समय समस्त शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ गाण्डीवधन्वा अर्जुन को भगवान श्रीकृष्ण ने युद्धभूमि में अपने व्यंग्यपूर्ण वचनों के चाबुक से बड़ी पीड़ा पहुँचाई ॥249॥   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 249
 
 
श्लोक  1.2.249 
वाक्यप्रतोदाभिहतो यत्र कृष्णेन पाण्डव:।
गाण्डीवधन्वा समरे सर्वशस्त्रभृतां वर:॥ २४९॥
 
 
अनुवाद
उसी समय समस्त शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ गाण्डीवधन्वा अर्जुन को भगवान श्रीकृष्ण ने युद्धभूमि में अपने व्यंग्यपूर्ण वचनों के चाबुक से बड़ी पीड़ा पहुँचाई ॥249॥
 
At the same time, Gandivadhanva Arjuna, the best amongst all the weapon-wielders, was inflicted a painful blow on the battlefield by Lord Krishna with the whip of his sarcastic statement. 249॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)