श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 242-244h
 
 
श्लोक  1.2.242-244h 
उद्योगपर्व निर्दिष्टं संधिविग्रहमिश्रितम्।
अध्यायानां शतं प्रोक्तं षडशीतिर्महर्षिणा॥ २४२॥
श्लोकानां षट्सहस्राणि तावन्त्येव शतानि च।
श्लोकाश्च नवति: प्रोक्तास्तथैवाष्टौ महात्मना॥ २४३॥
व्यासेनोदारमतिना पर्वण्यस्मिंस्तपोधना:।
 
 
अनुवाद
इस उद्योग पर्व में श्रीकृष्ण द्वारा संधि संदेश तथा उल्लू द्वारा वियोग संदेश का महत्त्वपूर्ण वर्णन है। हे तपस्वी मुनियों! महर्षि व्यास ने इस पर्व में एक सौ छियासी (186) अध्याय रखे हैं तथा श्लोकों की संख्या छः हजार छः सौ अट्ठानवे (6,698) बताई है।
 
In this Udyog Parva, there is an important description of the treaty message by Shri Krishna and the separation message by the owl. O great sages of tapasya! The great sage Vyas has kept one hundred and eighty six (186) chapters in this Parva and has stated the number of verses to be six thousand six hundred and ninety eight (6,698). 242-243 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)