श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 234
 
 
श्लोक  1.2.234 
महर्षेश्चापि चरितं कथितं गालवस्य वै।
विदुलायाश्च पुत्रस्य प्रोक्तं चाप्यनुशासनम्॥ २३४॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद महर्षि गालव का चरित्र वर्णित है। साथ ही विदुला द्वारा अपने पुत्र को दी गई शिक्षाओं का भी उल्लेख है।
 
After this, the character of Maharishi Galav is described. Along with this, the teachings given by Vidula to her son are also mentioned. 234.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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