श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 233
 
 
श्लोक  1.2.233 
दम्भोद्भवस्य चाख्यानमत्रैव परिकीर्तितम्।
वरान्वेषणमत्रैव मातलेश्च महात्मन:॥ २३३॥
 
 
अनुवाद
इसी पर्व में दम्भोद्भव की कथा कही जाती है और साथ ही महात्मा मत्लिका द्वारा अपनी पुत्री के लिए वर ढूँढ़ने का प्रसंग भी आता है ॥ 233॥
 
In this very festival the story of Dambhodbhava is narrated and along with it there is also the episode of Mahatma Matlika looking for a groom for her daughter.॥ 233॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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