श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 231
 
 
श्लोक  1.2.231 
यत्र कृष्णो दयापन्न: संधिमिच्छन् महामति:।
स्वयमागाच्छमं कर्तुं नगरं नागसाह्वयम्॥ २३१॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रसंग में यह भी कथा है कि परम दयालु और सर्वज्ञ भगवान श्रीकृष्ण करुणा से परिपूर्ण होकर स्वयं शांति स्थापना हेतु संधि करने के उद्देश्य से हस्तिनापुर नामक नगर में आये थे ॥231॥
 
In the same context, there is also a story that the most merciful and omniscient Lord Shri Krishna, full of compassion, himself came to a city called Hastinapur with the purpose of making a treaty to establish peace. 231॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)