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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल
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श्लोक 230
श्लोक
1.2.230
प्रभाते राजसमितौ संजयो यत्र वा विभो:।
ऐकात्म्यं वासुदेवस्य प्रोक्तवानर्जुनस्य च॥ २३०॥
अनुवाद
प्रातःकाल राजसभामें संजयने राजा धृतराष्ट्रसे श्रीकृष्ण और अर्जुनकी एकता या मित्रताका बहुत सुन्दर वर्णन किया ॥230॥
In the morning royal court, Sanjay very well described the unity or friendship of Shri Krishna and Arjun to King Dhritarashtra. 230॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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