श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  1.2.23-24 
अक्षौहिण्या: प्रसंख्याता रथानां द्विजसत्तमा:।
संख्या गणिततत्त्वज्ञै: सहस्राण्येकविंशति:॥ २३॥
शतान्युपरि चैवाष्टौ तथा भूयश्च सप्तति:।
गजानां च परीमाणमेतदेव विनिर्दिशेत्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
श्रेष्ठ ब्राह्मणों! गणित के दार्शनिक विद्वानों ने एक अक्षौहिणी सेना में रथों की संख्या इक्कीस हजार आठ सौ सत्तर (21,870) बताई है। हाथियों की संख्या भी उतनी ही कहनी चाहिए। 23-24॥
 
Best Brahmins! The philosophical scholars of mathematics have stated the number of chariots in an Akshauhini army to be twenty one thousand eight hundred seventy (21,870). The number of elephants should also be said to be the same. 23-24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)