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mahabharat 1.2.229: उसी समय महर्षि सनत्सुजातने दुःखी एवं शोकाकुल राजा धृतराष्ट्रको उत्तम अध्यात्मशास्त्रका श्रवण कराया ॥229॥   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 229
 
 
श्लोक  1.2.229 
तथा सनत्सुजातेन यत्राध्यात्ममनुत्तमम्।
मनस्तापान्वितो राजा श्रावित: शोकलालस:॥ २२९॥
 
 
अनुवाद
उसी समय महर्षि सनत्सुजातने दुःखी एवं शोकाकुल राजा धृतराष्ट्रको उत्तम अध्यात्मशास्त्रका श्रवण कराया ॥229॥
 
At the same time, Maharishi Sanatsujata made the dejected and grief stricken King Dhritarashtra listen to the best spiritual scriptures. 229॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)