श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 220
 
 
श्लोक  1.2.220 
अयुध्यमानमात्मानं मन्त्रिणं पुरुषर्षभौ।
अक्षौहिणीं वा सैन्यस्य कस्य किं वा ददाम्यहम्॥ २२०॥
 
 
अनुवाद
'दुर्योधन और अर्जुन! तुम दोनों ही महापुरुष हो। युद्ध करने के स्थान पर मैं स्वयं एक का मंत्री बनूँगा और दूसरे को सेना दूँगा। अब तुम दोनों ही निश्चय करो कि किसे क्या देना है?' 220॥
 
'Duryodhana and Arjuna! Both of you are great men. Instead of fighting, I myself will become minister to one and give an army to the other. Now both of you decide as to whom to give what? 220॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)