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mahabharat 1.2.22: तीन प्रतानों से एक चमू, तीन चमू से एक अनीकिनी और दस अनीकिनी से एक अक्षौहिणी बनती है। ऐसा विद्वानों का कथन है॥ 22॥   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.2.22 
चमूस्तु पृतनास्तिस्रस्तिस्रश्चम्बस्त्वनीकिनी।
अनीकिनीं दशगुणां प्राहुरक्षौहिणीं बुधा:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
तीन प्रतानों से एक चमू, तीन चमू से एक अनीकिनी और दस अनीकिनी से एक अक्षौहिणी बनती है। ऐसा विद्वानों का कथन है॥ 22॥
 
Three pṛtanās make one camū, three camūs make one anīkīni, and ten anīkinīs make one akṣauhiṇī. This is the statement of learned men.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)