श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 212
 
 
श्लोक  1.2.212 
गोधनं च विराटस्य मोक्षितं यत्र पाण्डवै:।
अनन्तरं च कुरुभिस्तस्य गोग्रहणं कृतम्॥ २१२॥
 
 
अनुवाद
इसके साथ ही पांडवों ने त्रिगर्तों से अपने मवेशियों को भी मुक्त करा लिया। इसके बाद कौरवों ने विराटनगर पर आक्रमण कर दिया और उनकी (उत्तर दिशा की) गायों को लूटना शुरू कर दिया।
 
Along with that the Pandavas also freed their cattle from the Trigartas. After this the Kauravas attacked Viratnagar and started looting their cows (of the north direction).
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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