श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 208
 
 
श्लोक  1.2.208 
पाञ्चालीं प्रार्थयानस्य कामोपहतचेतस:।
दुष्टात्मनो वधो यत्र कीचकस्य वृकोदरात्॥ २०८॥
 
 
अनुवाद
कीचक स्वभाव से ही दुष्ट था। द्रौपदी को देखते ही उसका हृदय प्रेमबाण से घायल हो गया। वह द्रौपदी का पीछा करने लगा। इसी अपराध के कारण भीमसेन ने उसका वध कर दिया। यह कथा इसी पर्व में है।
 
Keechak was wicked by nature. As soon as he saw Draupadi, his heart was wounded by the arrow of love. He started pursuing Draupadi. For this crime, Bhimasena killed him. This story is in this festival.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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