श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 203-204
 
 
श्लोक  1.2.203-204 
जग्मुर्लब्धवरा यत्र पाण्डवा: पश्चिमां दिशम्।
एतदारण्यकं पर्व तृतीयं परिकीर्तितम्॥ २०३॥
अत्राध्यायशते द्वे तु संख्यया परिकीर्तिते।
एकोनसप्ततिश्चैव तथाध्याया: प्रकीर्तिता:॥ २०४॥
 
 
अनुवाद
और उनसे आशीर्वाद प्राप्त कर पांडव पश्चिम की ओर चल पड़े। यह तीसरे वन पर्व की सूची है। इस पर्व में दो सौ उनहत्तर (269) अध्याय हैं। 203-204.
 
And after receiving blessings from them, the Pandavas travelled towards the west. This is the list of the third Vana Parva. In this Parva, two hundred and seventy nine (269) chapters are counted. 203-204.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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