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mahabharat 1.2.202: इस संदर्भ में, इंद्र ने प्रसन्न होकर कर्ण को एक ऐसी शक्ति प्रदान की जिससे वह किसी भी योद्धा का वध कर सकता था। इसके बाद आता है अरण्य उपाख्यान, जिसकी शिक्षा धर्मराज ने अपने पुत्र युधिष्ठिर को दी थी।   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 202
 
 
श्लोक  1.2.202 
यत्रास्य शक्तिं तुष्टोऽसावदादेकवधाय च।
आरणेयमुपाख्यानं यत्र धर्मोऽन्वशात् सुतम्॥ २०२॥
 
 
अनुवाद
इस संदर्भ में, इंद्र ने प्रसन्न होकर कर्ण को एक ऐसी शक्ति प्रदान की जिससे वह किसी भी योद्धा का वध कर सकता था। इसके बाद आता है अरण्य उपाख्यान, जिसकी शिक्षा धर्मराज ने अपने पुत्र युधिष्ठिर को दी थी।
 
In this context, Indra, pleased with him, gave Karna a power with which he could kill any warrior. After this comes the Araneya Upakhyan, in which Dharmaraja taught his son Yudhishthira.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)