श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 198
 
 
श्लोक  1.2.198 
दुर्वाससोऽप्युपाख्यानमत्रैव परिकीर्तितम्।
जयद्रथेनापहारो द्रौपद्याश्चाश्रमान्तरात्॥ १९८॥
 
 
अनुवाद
इसमें दुर्वासाजी तथा जयद्रथ द्वारा आश्रम से द्रौपदी के हरण की कथा भी वर्णित है।198.
 
In this the story of Durvasaji and the abduction of Draupadi from the ashram by Jayadrath is also narrated. 198.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)