श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 196
 
 
श्लोक  1.2.196 
ह्रियमाणस्तु मन्दात्मा मोक्षितोऽसौ किरीटिना।
धर्मराजस्य चात्रैव मृगस्वप्ननिदर्शनम्॥ १९६॥
 
 
अनुवाद
जब मंदबुद्धि दुर्योधन को बंदी बनाया जा रहा था, तब अर्जुन ने युद्ध करके उसे मुक्त कराया। तत्पश्चात् धर्मराज युधिष्ठिर ने स्वप्न में एक मृग देखा ॥196॥
 
The slow-witted Duryodhan was being taken captive when Arjun fought and freed him. After this, Dharmaraja Yudhishthira saw a deer in his dream.॥196॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)