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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल
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श्लोक 195
श्लोक
1.2.195
पुनर्द्वैतवनं चैव पाण्डवा: समुपागता:।
घोषयात्रा च गन्धर्वैर्यत्र बद्ध: सुयोधन:॥ १९५॥
अनुवाद
तत्पश्चात् धर्मात्मा पाण्डव पुनः द्वैतवन में आये। कौरवों ने घोषयात्रा की और गन्धर्वों ने दुर्योधन को पकड़ लिया ॥195॥
After that the righteous Pandavas again came to Dwaitavan. The Kauravas performed the Ghosha Yatra and the Gandharvas captured Duryodhana. 195॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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