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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल
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श्लोक 193
श्लोक
1.2.193
मार्कण्डेयसमास्या च पुराणं परिकीर्त्यते।
ऐन्द्रद्युम्नमुपाख्यानं धौन्धुमारं तथैव च॥ १९३॥
अनुवाद
इस मार्कण्डेय-समागममें पुराणोंकी अनेक कथाएँ, राजा इन्द्रद्युम्नका उपाख्यान तथा धुंधुमारकी कथा है ॥193॥
In this Markandeya-Samagam, there are many stories from the Puranas, the anecdote of King Indradyumna and the story of Dhundhumar. 193॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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