Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.2.192: इस प्रसंग में प्रसिद्ध महात्मा महर्षि तार्क्ष्य और सरस्वती का संवाद है। तत्पश्चात् मत्स्योपाख्यान का भी उल्लेख किया गया है। 192॥   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 192
 
 
श्लोक  1.2.192 
संवादश्च सरस्वत्यास्तार्क्ष्यर्षे: सुमहात्मन:।
मत्स्योपाख्यानमत्रैव प्रोच्यते तदनन्तरम्॥ १९२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रसंग में प्रसिद्ध महात्मा महर्षि तार्क्ष्य और सरस्वती का संवाद है। तत्पश्चात् मत्स्योपाख्यान का भी उल्लेख किया गया है। 192॥
 
In this context, there is a dialogue between the famous Mahatma Maharishi Tarkshya and Saraswati. Subsequently, Matsyopakhyan has also been mentioned. 192॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)