श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 191
 
 
श्लोक  1.2.191 
मार्कण्डेयसमास्यायामुपाख्यानानि सर्वश:।
पृथोर्वैन्यस्य यत्रोक्तमाख्यानं परमर्षिणा॥ १९१॥
 
 
अनुवाद
पाण्डवों की महर्षि मार्कण्डेय से भेंट हुई। वहाँ महर्षि ने अनेक कथाएँ सुनाईं। उनमें वेनपुत्र पृथु की कथा भी थी ॥191॥
 
The Pandavas had a meeting with the great sage Markandeya. There the sage narrated many stories. Among them was the story of Venaputra Prithu.॥191॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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