श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 190
 
 
श्लोक  1.2.190 
तत्रस्थांश्च पुनर्द्रष्टुं पाण्डवान् पुरुषर्षभान्।
वासुदेवस्यागमनमत्रैव परिकीर्तितम्॥ १९०॥
 
 
अनुवाद
जब महाबली पाण्डव काम्यक वन में रहने लगे, तब वसुदेवनन्दन श्रीकृष्ण उनसे मिलने आये - इसी प्रसंग में यह कथा कही गई है ॥190॥
 
When the mighty men Pandavas started living in the Kamyak forest, then Vasudevanandan Sri Krishna came to meet them - this story has been narrated in this context.॥ 190॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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