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mahabharat 1.2.185-186: वहाँ बुद्धिमान् अर्जुन ने स्वयं राजा युधिष्ठिर को देवताओं के शत्रु निवातकवच, पौलोम और कालकेय नामक भयंकर राक्षसों के साथ हुए युद्ध का वृत्तांत सुनाया और बताया कि वे सब कैसे मारे गए। इसके बाद अर्जुन ने धर्मराज युधिष्ठिर के सामने अपने अस्त्र-शस्त्र दिखाने चाहे।॥185-186॥   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 185-186
 
 
श्लोक  1.2.185-186 
निवातकवचैर्घोरैर्दानवै: सुरशत्रुभि:।
पौलोमै: कालकेयैश्च यत्र युद्धं किरीटिन:॥ १८५॥
वधश्चैषां समाख्यातो राज्ञस्तेनैव धीमता।
अस्त्रसंदर्शनारम्भो धर्मराजस्य संनिधौ॥ १८६॥
 
 
अनुवाद
वहाँ बुद्धिमान् अर्जुन ने स्वयं राजा युधिष्ठिर को देवताओं के शत्रु निवातकवच, पौलोम और कालकेय नामक भयंकर राक्षसों के साथ हुए युद्ध का वृत्तांत सुनाया और बताया कि वे सब कैसे मारे गए। इसके बाद अर्जुन ने धर्मराज युधिष्ठिर के सामने अपने अस्त्र-शस्त्र दिखाने चाहे।॥185-186॥
 
There the wise Arjuna himself narrated to King Yudhishthira the story of the battle he fought with the fierce demons Nivatakavaca, Pauloma and Kalakeyas, enemies of the gods, and how they were all killed. After this Arjuna wanted to display his weapons in front of Dharmaraja Yudhishthira.॥185-186॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)