श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.2.18 
अक्षौहिण्या: परीमाणं नराश्वरथदन्तिनाम्।
यथावच्चैव नो ब्रूहि सर्वं हि विदितं तव॥ १८॥
 
 
अनुवाद
अक्षौहिणी सेना में कितने पैदल, घोड़े, रथ और हाथी हैं? इसका ठीक-ठीक वर्णन हमसे कहिए; क्योंकि आप सब कुछ जानते हैं॥18॥
 
How many infantry, horses, chariots and elephants are there in the Akshauhini army? Tell us the exact description of this; because you know everything.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)