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mahabharat 1.2.177-178: द्रौपदी ने भीमसेन को सुगंधित कमल लाने के लिए गंधमादन पर्वत भेजा। यात्रा करते समय, पराक्रमी भीमसेन ने मार्ग में केले के वन में महाबली पवनपुत्र श्री हनुमानजी को देखा। यहाँ भीमसेन ने सरोवर में प्रवेश किया और सुगंधित कमल के लिए उसका मंथन किया। 177-178   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.2.177-178 
नियुक्तो भीमसेनश्च द्रौपद्या गन्धमादने।
व्रजन् पथि महाबाहुर्दृष्टवान् पवनात्मजम्॥ १७७॥
कदलीखण्डमध्यस्थं हनूमन्तं महाबलम्।
यत्र सौगन्धिकार्थेऽसौ नलिनीं तामधर्षयत्॥ १७८॥
 
 
अनुवाद
द्रौपदी ने भीमसेन को सुगंधित कमल लाने के लिए गंधमादन पर्वत भेजा। यात्रा करते समय, पराक्रमी भीमसेन ने मार्ग में केले के वन में महाबली पवनपुत्र श्री हनुमानजी को देखा। यहाँ भीमसेन ने सरोवर में प्रवेश किया और सुगंधित कमल के लिए उसका मंथन किया। 177-178
 
Draupadi sent Bhimasena to Gandhamadana mountain to bring fragrant lotus. While travelling, the powerful Bhimasena saw the mighty son of Pawana, Shri Hanumanji in the banana forest on the way. Here, Bhimasena entered the lake and churned it for fragrant lotus. 177-178.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)