श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 173
 
 
श्लोक  1.2.173 
तत: श्येनकपोतीयमुपाख्यानमनुत्तमम्।
इन्द्राग्नी यत्र धर्मस्य जिज्ञासार्थं शिबिं नृपम्॥ १७३॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद गरुड़ और कबूतर की अद्भुत कथा है। इसमें इंद्र और अग्नि राजा शिबि के धर्म की परीक्षा लेने आए हैं। (173)
 
After this there is a wonderful story of the eagle and the pigeon. In this Indra and Agni have come to test the religion of King Shibi. 173.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)