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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल
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श्लोक 172
श्लोक
1.2.172
जन्तूपाख्यानमत्रैव यत्र पुत्रेण सोमक:।
पुत्रार्थमयजद् राजा लेभे पुत्रशतं च स:॥ १७२॥
अनुवाद
यह जन्तुपाख्यान है। इसमें राजा सोमक ने एक पुत्र से अनेक पुत्रों की प्राप्ति हेतु यज्ञ किया था और उसके फलस्वरूप उन्हें सौ पुत्र प्राप्त हुए थे॥172॥
This is the Jantupaakhyan. In this, King Somaka performed a yajna with one son to get many sons and as a result got hundred sons.॥ 172॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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