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mahabharat 1.2.170: इसके बाद सुकन्याका उपाख्यान है। इसमें कथा है कि भृगुनन्दन च्यवन ने शर्यातिका यज्ञ में अश्विनीकुमारों को सोमपान का अधिकारी बनाया था ॥170॥   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 170
 
 
श्लोक  1.2.170 
सौकन्यमपि चाख्यानं च्यवनो यत्र भार्गव:।
शर्यातियज्ञे नासत्यौ कृतवान् सोमपीतिनौ॥ १७०॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद सुकन्याका उपाख्यान है। इसमें कथा है कि भृगुनन्दन च्यवन ने शर्यातिका यज्ञ में अश्विनीकुमारों को सोमपान का अधिकारी बनाया था ॥170॥
 
After this is the Sukanyaka anecdote. There is a story in this that Bhrigunandan Chyavan made the Ashwini Kumars the right to drink Sompan in the Yagya of Sharyatika. 170॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)