श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.2.17 
ऋषय ऊचु:
अक्षौहिण्य इति प्रोक्तं यत्त्वया सूतनन्दन।
एतदिच्छामहे श्रोतुं सर्वमेव यथातथम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
ऋषियों ने पूछा - हे सूतनंदन! आपने अभी जो अक्षौहिणी शब्द कहा है, उसका यथार्थ वर्णन हम सुनना चाहते हैं॥ 17॥
 
The sages asked - O Sutanandan! We want to hear the exact details about the word Akshauhini that you just uttered.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)