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mahabharat 1.2.157: व्यास के चले जाने के बाद पांडव काम्यकवन गए। इसके बाद अत्यंत तेजस्वी अर्जुन अपने भाइयों के साथ शस्त्र प्राप्त करने के लिए चले गए।   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 157
 
 
श्लोक  1.2.157 
गमनं काम्यके चापि व्यासे प्रतिगते तत:।
अस्त्रहेतोर्विवासश्च पार्थस्यामिततेजस:॥ १५७॥
 
 
अनुवाद
व्यास के चले जाने के बाद पांडव काम्यकवन गए। इसके बाद अत्यंत तेजस्वी अर्जुन अपने भाइयों के साथ शस्त्र प्राप्त करने के लिए चले गए।
 
After Vyasa left, the Pandavas visited Kamyakavana. After this, the extremely brilliant Arjuna left his brothers to obtain weapons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)