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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल
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श्लोक 156
श्लोक
1.2.156
समीपं पाण्डुपुत्राणां व्यासस्यागमनं तथा।
प्रतिस्मृत्याथ विद्याया दानं राज्ञो महर्षिणा॥ १५६॥
अनुवाद
महर्षि व्यास ने पाण्डवों के पास आकर राजा युधिष्ठिर को प्रतिस्मृति नामक मन्त्र विद्या सिखाई ॥156॥
Maharishi Vyas came to the Pandavas and taught the art of mantra called Pratismriti to King Yudhishthira. 156॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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