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mahabharat 1.2.151: जब श्रीकृष्ण ने सुना कि शकुनि ने छलपूर्वक पाण्डवों को जुए में हरा दिया है, तो वे अत्यन्त क्रोधित हुए; किन्तु अर्जुन ने हाथ जोड़कर उन्हें शांत किया।   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 151
 
 
श्लोक  1.2.151 
श्रुत्वा शकुनिना द्यूते निकृत्या निर्जितांश्च तान्।
क्रुद्धस्यानुप्रशमनं हरेश्चैव किरीटिना॥ १५१॥
 
 
अनुवाद
जब श्रीकृष्ण ने सुना कि शकुनि ने छलपूर्वक पाण्डवों को जुए में हरा दिया है, तो वे अत्यन्त क्रोधित हुए; किन्तु अर्जुन ने हाथ जोड़कर उन्हें शांत किया।
 
When Shri Krishna heard that Shakuni had defeated the Pandavas in gambling by deceit, he became very angry; but Arjuna pacified him with folded hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)