श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.2.15 
समेत्य तं द्विजास्ताश्च तत्रैव निधनं गता:।
एतन्नामाभिनिर्वृत्तं तस्य देशस्य वै द्विजा:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मणों! वे सारी सेनाएँ वहाँ एकत्रित होकर नष्ट हो गईं। हे ब्राह्मणों! इसलिए उस देश का नाम समन्तपंचक पड़ा।
 
O Brahmins! All those armies gathered there and were destroyed there. O Brahmins! Hence the name of that country became Samanta-pancaka.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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