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mahabharat 1.2.141-142: हे श्रेष्ठ ब्राह्मणों! इस पर्व में अध्यायों की संख्या अट्ठहत्तर (78) और श्लोकों की संख्या दो हजार पाँच सौ ग्यारह (2,511) कही गई है। इसके बाद महत्त्वपूर्ण वनपर्व प्रारम्भ होता है ॥141-142॥   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 141-142
 
 
श्लोक  1.2.141-142 
अध्याया: सप्ततिर्ज्ञेयास्तथा चाष्टौ प्रसंख्यया।
श्लोकानां द्वे सहस्रे तु पञ्च श्लोकशतानि च॥ १४१॥
श्लोकाश्चैकादश ज्ञेया: पर्वण्यस्मिन् द्विजोत्तमा:।
अत: परं तृतीयं तु ज्ञेयमारण्यकं महत्॥ १४२॥
 
 
अनुवाद
हे श्रेष्ठ ब्राह्मणों! इस पर्व में अध्यायों की संख्या अट्ठहत्तर (78) और श्लोकों की संख्या दो हजार पाँच सौ ग्यारह (2,511) कही गई है। इसके बाद महत्त्वपूर्ण वनपर्व प्रारम्भ होता है ॥141-142॥
 
O great Brahmins! The number of chapters in this festival is seventy eight (78) and the number of verses is said to be two thousand five hundred and eleven (2,511). After this, the important Vana Parva begins. ॥141-142॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)