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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल
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श्लोक 14
श्लोक
1.2.14
तस्मिन् परमधर्मिष्ठे देशे भूदोषवर्जिते।
अष्टादश समाजग्मुरक्षौहिण्यो युयुत्सया॥ १४॥
अनुवाद
भूमि-संबंधी दोषों से रहित उस परम धर्ममय प्रदेश में युद्ध करने की इच्छा से अठारह अक्षौहिणी सेनाएँ एकत्रित हुई थीं ॥14॥
Eighteen Akshauhini armies had gathered with the desire to fight in that most religious region, free from land-related defects. 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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