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mahabharat 1.2.130: परम ऋषि एवं परम तेजस्वी महर्षि व्यास ने इस पर्व में दो सौ सत्ताईस (227) अध्यायों की रचना की है ॥130॥   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 130
 
 
श्लोक  1.2.130 
अध्यायानां शते द्वे तु संख्याते परमर्षिणा।
सप्तविंशतिरध्याया व्यासेनोत्तमतेजसा॥ १३०॥
 
 
अनुवाद
परम ऋषि एवं परम तेजस्वी महर्षि व्यास ने इस पर्व में दो सौ सत्ताईस (227) अध्यायों की रचना की है ॥130॥
 
The supreme sage and the most brilliant Maharishi Vyas has composed two hundred and twenty-seven (227) chapters in this festival. 130॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)