Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.2.127-128: इसके बाद द्रौपदी के पुत्रों के जन्म की कथा है। तत्पश्चात, जब श्रीकृष्ण और अर्जुन यमुना नदी के तट पर क्रीड़ा करने गए थे, तब उन्हें चक्र और धनुष की प्राप्ति कैसे हुई, इसका वर्णन है। साथ ही, खांडव वन के दग्ध होने, मयदानव के मुक्त होने तथा सर्प के अग्नि से पूर्णतः बच निकलने का भी वर्णन है। ॥127-128॥ | mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्रौपद्यास्तनयानां च सम्भवोऽनुप्रकीर्तित:।
विहारार्थं च गतयो: कृष्णयोर्यमुनामनु॥ १२७॥
सम्प्राप्तिश्चक्रधनुषो: खाण्डवस्य च दाहनम्।
मयस्य मोक्षो ज्वलनाद् भुजङ्गस्य च मोक्षणम्॥ १२८॥
अनुवाद
इसके बाद द्रौपदी के पुत्रों के जन्म की कथा है। तत्पश्चात, जब श्रीकृष्ण और अर्जुन यमुना नदी के तट पर क्रीड़ा करने गए थे, तब उन्हें चक्र और धनुष की प्राप्ति कैसे हुई, इसका वर्णन है। साथ ही, खांडव वन के दग्ध होने, मयदानव के मुक्त होने तथा सर्प के अग्नि से पूर्णतः बच निकलने का भी वर्णन है। ॥127-128॥
After this, there is the story of the birth of Draupadi's sons. Thereafter, when Shri Krishna and Arjun went to play on the banks of river Yamuna, the way they got the Chakra and the bow is described. Along with this, the burning of Khandav forest, the release of Mayadanav and the complete escape of the snake from the fire are described. ॥127-128॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥