श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 123-124
 
 
श्लोक  1.2.123-124 
पुण्यतीर्थानुसंयानं बभ्रुवाहनजन्म च।
तत्रैव मोक्षयामास पञ्च सोऽप्सरस: शुभा:॥ १२३॥
शापाद् ग्राहत्वमापन्ना ब्राह्मणस्य तपस्विन:।
प्रभासतीर्थे पार्थेन कृष्णस्य च समागम:॥ १२४॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद अर्जुन ने पवित्र तीर्थस्थानों का भ्रमण किया। उसी समय चित्रांगदा के गर्भ से बभ्रुवाहन का जन्म हुआ और इस यात्रा के दौरान उन्होंने एक तपस्वी ब्राह्मण के शाप से फँसी हुई पाँच शुभ अप्सराओं को मुक्त किया। तत्पश्चात प्रभास तीर्थ में श्रीकृष्ण और अर्जुन की भेंट का वर्णन है। ॥123-124॥
 
After this Arjuna visited holy places of pilgrimage. At the same time Babruvahan was born from Chitrangada's womb and during this journey he freed five auspicious Apsaras who were trapped due to the curse of an ascetic Brahmin. Then the meeting of Shri Krishna and Arjuna at Prabhas Tirtha is described. ॥123-124॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)