Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.2.120-122: इस प्रसंग में सुन्द और उपसुन्द की कथा भी वर्णित है। तत्पश्चात, एक दिन धर्मराज युधिष्ठिर द्रौपदी के साथ बैठे थे। अर्जुन ने ब्राह्मणों के लिए बनाए गए नियम को तोड़कर वहाँ प्रवेश किया और अपने अस्त्र-शस्त्र लेकर ब्राह्मण की वस्तुएँ उसे दे दीं तथा दृढ़ निश्चय करके वीरतापूर्वक नियमों का पालन करने के लिए वन में चले गए। इसी प्रसंग में यह कथा भी कही जाती है कि वनवास के समय अर्जुन और उलूपी की मार्ग में ही भेंट हुई थी॥120-122॥ | mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इस प्रसंग में सुन्द और उपसुन्द की कथा भी वर्णित है। तत्पश्चात, एक दिन धर्मराज युधिष्ठिर द्रौपदी के साथ बैठे थे। अर्जुन ने ब्राह्मणों के लिए बनाए गए नियम को तोड़कर वहाँ प्रवेश किया और अपने अस्त्र-शस्त्र लेकर ब्राह्मण की वस्तुएँ उसे दे दीं तथा दृढ़ निश्चय करके वीरतापूर्वक नियमों का पालन करने के लिए वन में चले गए। इसी प्रसंग में यह कथा भी कही जाती है कि वनवास के समय अर्जुन और उलूपी की मार्ग में ही भेंट हुई थी॥120-122॥
In this context, the story of Sunda and Upasunda is also described. Thereafter, one day Dharmaraj Yudhishthira was sitting with Draupadi. Arjun broke the rules for Brahmins and entered there and took his weapons and gave the Brahmin's things to him and with firm resolve, went to the forest to follow the rules with bravery. In this context, this story is also told that during the exile, Arjun and Ulupi met on the way itself.॥120-122॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥