श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 117
 
 
श्लोक  1.2.117 
पञ्चेन्द्राणामुपाख्यानमत्रैवाद्‍भुतमुच्यते ।
द्रौपद्या देवविहितो विवाहश्चाप्यमानुष:॥ ११७॥
 
 
अनुवाद
इसी विवाहोत्सव में पांच इंद्रियों की अद्भुत कथा तथा द्रौपदी के विवाह की कथा सुनाई जाती है, जो देवताओं द्वारा निर्धारित तथा मानवीय परंपरा के विपरीत था।
 
In this very marriage festival the wonderful story of the five senses and the marriage of Draupadi, which was ordained by the gods and was contrary to human tradition, are narrated.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)