श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 109-110
 
 
श्लोक  1.2.109-110 
सम्भवश्चैव कृष्णाया धृष्टद्युम्नस्य चैव ह।
ब्राह्मणात् समुपश्रुत्य व्यासवाक्यप्रचोदिता:॥ १०९॥
द्रौपदीं प्रार्थयन्तस्ते स्वयंवरदिदृक्षया।
पञ्चालानभितो जग्मुर्यत्र कौतूहलान्विता:॥ ११०॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद कृष्ण (द्रौपदी) और उनके भाई धृष्टद्युम्न के जन्म का वर्णन है। जब पांडवों को ब्राह्मण से यह समाचार मिला, तब महर्षि व्यास की आज्ञा से वे जिज्ञासु मन से द्रौपदी का स्वयंवर देखने के लिए पांचाल देश की ओर चल पड़े। 109-110।
 
After this, the birth of Krishna (Draupadi) and her brother Dhrishtadyumna is described. When the Pandavas got this news from the Brahmin, then on the orders of Maharishi Vyas, they set out towards Panchal country to witness the swayamvara for Draupadi with a curious mind. 109-110.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)